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Romantic PoetryPoetry1 min read

कारवाँ और इश्क ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini August 24, 2022
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कारवाँ के साथ बेखुद चले जा रहे हो,

ये किसकी मुहब्बत में बेसुध जले जा रहे हो,

कारवाँ के साथ भी चलना खुद ही पड़ता है,

इश्क की आग में जलना भी खुद को पड़ता है। 

 - राजीव ' हैरान '

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