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Romantic PoetryPoetry1 min read

जुदाई का नश्तर। ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini August 3, 2022
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जैसे और धोखे हैं जवानी में खाए,

तेरा गम भी जिन्दगी में पालते रहेंगे,

है गमों से घायल जिगर अपना फिर भी,

जुदाई का नश्तर दिल पर उछालते रहेंगे।

 - राजीव ' हैरान '

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