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Romantic PoetryPoetry1 min read

दर्द-ओ-ग़म ' हैरान '

Rajeev Kumar SainiRajeev Kumar Saini April 20, 2022
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वो आजकल कुछ कम बोलते हैं,

बहुत आहिस्ता मेरे सनम बोलते हैं,

हुस्न और इश्क तकाबुल है शायद,

बातों में उनकी दर्द-ओ- ग़म बोलते हैं.

 - राजीव ' हैरान '

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