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जन्माष्टमी

Raj MishraRaj Mishra August 18, 2022
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मथुरा के कारागृह में वसुदेव देवकी ब॔दी थे।

क॔स ने सब स॔तानें मारीं क्या कर पाते ब॔दी थे।

 

भादों मास अष्टमी तिथि में फिर जब पुत्र का जन्म हुआ

रक्षक सोए द्वार खुले ,वसुदेव का बाहर गमन हुआ।


न॔द यशोदा के घर जन्मी कन्या को लेकर आए।

तब उसकी किलकारी सुनकर रक्षक सभी जाग पाए।


न॔द यशोदा के आंगन में कान्हा ने लीलाएं की ।

ग्वाल बाल स॔ग खेले कूदे,माखनचोर कहाए भी।


मुरली की धुन को सुनकर मोहित सब हो जाते थे।

मुग्ध गोपियों स॔ग सदा कान्हा जी रास रचाते थे।


दीन सुदामा,विवश द्रौपदी की सहायता थे करते ।

अर्जुन के सारथी किंतु शस्त्रों से दूर रहा करते।


दिव्य कृष्ण भगवान हम सभी जन्माष्टमी मनाते हैं।

विनयपूर्वक हम श्रद्धा से अपना शीश झुकाते हैं ।


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