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भूत और चुड़ैल भाग 4

Raj MishraRaj Mishra October 9, 2021
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पहाड़ की यात्रा का संयोग भी शीध्र ही उपस्थित हो गया। 

एक फौजी छुट्टियों में पास के गांव में आया हुआ था। ध।वह अपने माता पिता को कार से इस बार उत्तराखंड की सैर कराना चाहता था। भूत ने चुड़ैल को यह बात बताई। मन की मुराद पूरी होते देख दोनों बहुत खुश हुए। 


फौजी ने कार में जरूरत का सामान रखा। माता पिता को बैठा कर गाड़ी स्टार्ट की। भूत और चुड़ैल भी एक कोने में समा गए। यात्रा का शुभारंभ हो गया। दोनों को मजा आ रहा था। उत्तर प्रदेश पार कर उत्तराखंड जना था। हल्की बूंदाबांदी हो रही थी । 


मौसम सुहाना धा षर॔तु सड़कें अच्छी नहीं थीं। कहीं गड्ढायुक्त तो कहीं ऊंची नीची थीं। साधधानी से गाड़ी चलानी पड़ रही थी। नजीबाबाद की सड़क बहुत दुखदाई थी। उत्तराखंड आ गया। एक भोजनालय में कुछ खा पीकर चल पड़े। सभी कोटद्वार पहुंच गए। 


कोटद्वार की सड़क पहाड़ के पास तक पहुंची हुई थी। आगे पहाड़ की चढ़ाई धी। रास्ता स॔करा था। एक ओर खड़ा पहाड़ और दूसरी ओर गहरी खाई। पहाड़ से टूट कर गिरे प्रस्तर ख॔ड जहां तहां पड़े हुए थे।नीचे खाई में बस्तियां भी थीं। कहीं कहीं जलधारा भी बह रही थी। 


सभी सबसे ऊपरी भाग पर पहुंचे -टिप इन टाॅप। वापसी में एक सैन्य स॔ग्रहालय देखा। सेना द्वारा ही ठहरने की व्यवस्था थी। कमरों में प॔खे नहीं लगे थे ।उनकी वहां कोई जरूरत भी नहीं थी ।फोटो सेशन हुए।वहां की सुखद अनुभूतियों के साथ लौटे।फिर पीपल पर बैक।

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