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                 " कौन है वह " 

कौन है वह जो कंदराओं में विचरता ,
पाहनो में पुष्प खिलाने की बात करता ,
कौन है वह .....

वह जब नाम लेकर मेरा पुकारता ,
प्रतिध्वनि की गूंज से हिमालय भी सहमा करता ,
कौन है वह .......

निरंतर ढूंढता है घाटियों में 
वह मेरी आवाज को ,
व्यथित होता नही 
सजाना सोचता है वह 
मेरे हर साज को ,
कौन है वह जो काँटों से प्रेम करता ,
कौन है वह......

द्रवित कर बादलों को 
ताप वह अपना दिखा देता ,
खुद द्रवित हो , सलिल बन 
सैकड़ों नदियां बहा देता ,
तड़ित से दिशाएं भी चमक जाती ,
सुन उन्माद गर्जन का 
उदधि लहरें बहक जाती ,
झगड़ करके हवाओं से 
मेघ लाने की बात करता ,
कौन है वह ......

चढ़ चाँद से भी 
राह वह निहारता मेरी ,
गलत वह है नही फिर भी 
हर भूल स्वीकारता मेरी ,
रमता समुंदर सोच में उसकी 
विचार में नीला वितान ,
देह का त्रैलोक्य पूरा 
हर रेत पर उसके निसान 
ब्रम्हांड से खातिर मेरी वह 
नखत तोड़ लाने की बात करता ,
कौन है वह जो कंदराओं में विचरता ,
पाहनो में पुष्प खिलाने की बात करता 
कौन है वह ...कौन है वह..

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