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सुन्दर राष्ट्र!

R N ShuklaR N Shukla September 10, 2021
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एक हैं हम नेक हैं हम–

मृदुल है झंकार! अपनी

उषः हो या हो निशा

हम करेंगे अमृत वर्षण!


एक गंगा , एक हिम है

एक ही धरती गगन है

एक ही उद्गम है अपना

एक ही ईश्वर हमारा।


बात को हम जानते हैं

तथ्य को पहचानते हैं

फिर,हम'विष'धारण क्यूँ करते?

क्यों न मिलकर साथ चलते?


हम गहेंगे भाव सुन्दर!

त्याग देंगे भाव कलुषित!

चल पड़ेंगे साथ मिलकर

जोड़ देंगे व्यथित जन-मन!


सृजन ही अपना इरादा

मिलन पर कोई न बाधा

पार करके दुःसह तम

निर्मित करेंगे राष्ट्र सुन्दर!!



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