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मत रोको मुझे ...

R N ShuklaR N Shukla April 23, 2022
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मत रोको मुझे 
जाने दो !

धरती से जुड़ा है
अस्तित्व मेरा !
मुझे जमीन से –
जुड़ जाने दो !
मत रोको मुझे
जाने दो !

गाँव की मिट्टी में –
छुपा है मेरे 
जीवन का सौंदर्य !
उसे निखर जाने दो !
मत रोको मुझे –
जाने दो !

पर्वत   –  पठारों  से ,
सरिता –  सागर  से ,
झील  –  झरनों से ,
वनों और जंगलों से ,
जुड़ा  है  प्राण ! मेरा 
इन  सब  से –
घुल-मिल लेने दो !
मत रोको मुझे -
जाने दो !


गरीब किसानों से ,
मजबूर मजदूरों से ,
झोपड़पट्टियों में –
शोषण और कुपोषण के
शिकार बने – नौनिहालों से 
प्यार  है  मुझे !
उनसे मिल आने दो !
वहीं  इन सब पर –
गिद्धदृष्टि ! डालती –
कातिल निगाहों से –
दो – चार  हाथ –
कर आने दो !
मत रोको मुझे –
जाने दो !

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