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क्यों मुझसे दूर जाना चाहते हो ?

R N ShuklaR N Shukla October 18, 2022
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मधुर संभाषणों में , जान बसती है हमारी !

बताओ क्यों कसैले बीज , बोना चाहते हो ?

जरा सा पास आ जाओ हमारे 

क्यों मुझसे दूर जाना चाहते हो ?


कभी फुर्सत के लम्हों को चुरालो व्यस्तताओं से

मिलो दिल खोलकर अपनो के दिल से मस्त हो जाओ !

ये जीवन कुछ क्षणों का है इसे अपनो के संग जी लो

क्यूँ अपनी जिंदगी में गमों का बीज बोना चाहते हो ?


चलो हम मान लेते हैं सभी आपत्तियां तेरी

चलो हम मान लेते हैं हमीं में गलतियां सारी

खतायें माफ कर मेरी, जरा आ पास तो बैठो 

क्यूँ मेरे दिल के पुष्पों के –

परागों को मसलना चाहते हो ?


पुकारे जब कोई दिल से, वहॉं दौड़े चले जाते 

दिलों को जीत लेते हैं ,बड़े होते है  दिलवाले !

जरा तुम पास तो आओ , यूँ ही भागा नहीं करते

बड़े अनमोल होते क्षण ! यूँ ही जाया नहीं करते

क्षणों को जो पकड़ ले आदमी,वो जीत जाता है

भला तुम क्यों क्षणों को,व्यर्थ करने पर तुले हो ?


ये बेरूखि तजकर ,अभी आ, यार तो  मिल लो

ये दुनिया चार दिन की है,इसे तुम प्यार से जी लो

दफा कर दो सभी वो  बदमिजाजी फालतू बातें !

बताओ शूल बनकर  क्यूँ 

मेरे दिल को दुखाने पर अड़े हो?



 


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