गुस्ताख़-दिल's image
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सारे जहाँ की खुशियाँ, 

उनके क़दमों में डाल दी मैंने

कितने गुस्ताख़ दिल हैं 'वो' कि

थोड़ा-सा  मुस्कुराये भी नहीं।

कितना झल्ला-झल्लाकर

फेंके थे कंकड़ पानी में,मैंने

वो  कितने  बेख़बर  हैं  कि

उन्हें  इस बात की खबर ही नहीं।

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