एक 'स्त्री' एक 'पुरुष''s image
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वह एक 'स्त्री'!

सहनशीलता की प्रतिमूर्ति!

तू एक पुरुष!

इतना उदण्ड!

उसके अधिकारों का–

किया क्रूरतमअपहरण!


माँ के 'गर्भ'में पला

उसके आँचल में हँसा

फिर,साथ पाया प्रिया का

खेलता रहा उसकी–

कोमल भावनाओं संग।


करता रहा स्वार्थ-पूर्ति–

अपनी वासनाओं की

छलता रहा जीवन भर

फिर भी वह चलती रही

तेरा साथ देती रही–

ताउम्र भूलती रही सारे गम।


तूने उसे बार-बार हार दिया!

उसके अधिकारों-

भावनाओं को मार दिया!

फिर भी उसने–

अपना सबकुछ -

तुझ पर ही वार दिया

तेरा जीवन सँवार दिया!


उपहास किया तूने–

उसके मन के भावों की


यह अधिकारलिप्सा-

स्वार्थलिप्सा क्यों?

क्योंकि तुम पुरुष हो

और, वह एक स्त्री?


क्या यही है धर्म तेरा?

क्या यही परिचय तुम्हारा?

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