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अधूरा अभिसार

R N ShuklaR N Shukla November 6, 2021
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चाँद आधा 

हो रहा है

रात घिरती 

जा रही है

मन मचलता 

जा रहा है

दिल धड़कता 

जा रहा है


रोशनी है 

जा चुकी 

पूरा अँधेरा 

हो गया है


चाँद पूरा 

खो गया है

रात की 

आगोश में

वो सो गया है....


साँस रोके 

जब–

कमरे से 

निकली 

वह

कि ठोकर 

लग गई!


धीरे से 

हलचल हुई

अँधेरे में 

कहीं गुम हुई...


फिर 

लौट आयी 

दिल के सब 

अरमान ले

कमरे के अंदर!

सो गई 

या

जागती ही 

रह गई

पूरी निशा!

कौन जाने?

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