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अदम्य साहस

R N ShuklaR N Shukla August 10, 2022
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सुख हो चाहे हो दुःख !
जीभर के जी लेता हूँ ।
जिंदगी के सारे जहर –
हँस-हँस के पी लेता हूँ ।

तू जितना भी आजमाए जा
ऐ  मेरी जिंदगी !
तुमसे मैं जीभर के प्यार कर लेता हूँ ।

तैरते-तैरते जब थकने लगता हूँ
तब पानी की सतह पर अपने को
पूरी तरह निढाल छोड़ देता हूँ –
कुछ क्षणों , कुछ मिण्टों के लिए !
आँखे बन्द किये ....

फिर धीरे-धीरे  .....
डूबने लगता है अस्तित्व !
गहरे जल में !

पर ,
तभी अदम्य साहस 
अतल-जल की गहराइयों से
यकायक जोरों से उछाल देता है
और फिर तैरने लगता हूँ  
जल की सतह पर !
और पार कर जाता हूँ  
नदी को ...समंदर को ...
जीवन को .....


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