आ भी जाओ कि चाँद छुपने को है !'s image
Poetry1 min read

आ भी जाओ कि चाँद छुपने को है !

R N ShuklaR N Shukla April 8, 2022
Share0 Bookmarks 67 Reads0 Likes
मुद्दतों हुए तुमसे मिले मुझे ,

इक तेरी याद है कि जाती ही नहीं ।

गुमाँ बहुत था मुझे; तुझे भूल जाने का ,

पर , ये दिल भी क्या चीज़ है कि भूलता ही नहीं ।

आ भी जाओ कि  रात ढ़लने को है ,

हमसफ़र है यह चाँद ! वो भी  छुपने को है "






No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts