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इश्क़ के व्यापार

Pushpendra Pal SinghPushpendra Pal Singh December 21, 2021
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वो जो तुम्हारें दिल के


वो जो तुम्हारें दिल के


कमरे की हर दर ओ दीवार में है


इतना भी नादां ना समझ उसे


इतना भी नादां ना समझ उसे


वो सदियों से इश्क़ के व्यापार में हैं


रचना :पुष्पेंद्र पाल सिंह



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