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Kumar VishwasPoetry1 min read

इस ढलती उम्र में आँखों से मैकशी करती हो

PurushottamPurushottam October 14, 2021
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इस ढलती उम्र में आँखों से मैकशी करती हो

बिना दांँत के तुम और ज्यादा हसीं लगती हो


यूंँ तो रंग-बिरंगे नए नोट आ गए हैं बाजार में

बावजूद चले तुम वो पुरानी करेंसी लगती हो

×××

©पुरुषोत्तम

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