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Aalok ShrivastavPoetry1 min read

दरिया ख़ुद प्यास बुझाए, तो क्या करें

PurushottamPurushottam November 17, 2022
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दरिया ख़ुद प्यास बुझाए, तो क्या करें

आँखें ही ख़्वाब चुराए, तो क्या करें


इंतिज़ार हो चांँदनी रात का, और जब

चांँद छत पर उतर आए, तो क्या करें

×××

©पुरुषोत्तम

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