जंगल की कविताएं's image
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मैं जंगल में गया था

कविताएं लिखने के लिए..

मेरे जाने से पहले ही लोग

कविताओं को काटकर ले गए।

मैं घर वापस आया

दरवाजा खोला

पहली कविता मिली,

खिड़की खोली

दूसरी कविता मिली,

कुर्सी पर बैठा

तीसरी कविता मिली,

रात को पलंग पर सोते वक्त

मुझे चौथी कविता मिली।

पर जंगल की कविताएं घर की चारदीवारी में मिली नहीं, मरी हुई मिली।


— पुखराज तेली | @poetpukhrajteli

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