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लिख देता हूॅं

Priyam DubeyPriyam Dubey August 16, 2022
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भूली बिसरी कोई कहानी लिख देता हूॅं
ज़हन में आई याद पुरानी, लिख देता हूॅं

कोई पूछे मेरे जीवन का मतलब अगर
मैं जीवन को बहता पानी लिख देता हूॅं

आसमाॅं में उड़े या शहीदों का कफ़न हो
रहेगा ये तिरंगा आसमानी लिख देता हूॅं

मुझ जैसे ही कई जवान कुर्बान हुए हैं
मैं भी देश के लिए जवानी लिख देता हूॅं

गुरूर, रुआब, शौर्य हमारा देखते जाओ
अपनी रईसी को खानदानी लिख देता हूॅं

जब भी कोई पूछे पहचान "प्रियम" का
मेरा पहचान मैं हिन्दुस्तानी लिख देता हूॅं

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