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फटा हुआ नोट

Priya KusumPriya Kusum October 7, 2021
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फटा हुआ नोट भी मुझको 

मन्दी की पहली चोट भी मुझको 


टूटे कप में चाय भी मुझको 

हर आफ़त की हाय भी मुझको 


बचा हुआ भोजन भी मुझको 

हर लिबास की उतरन भी मुझको 


बिना गलती की फ़टकार भी मुझको 

अस्पतालो की लम्बी कतार भी मुझको 


चोरी का पहला इल्जाम भी मुझको 

करते हुए जिसे दूसरो को घिन आए, 

करना है हर ऐसा काम भी मुझको 

और पूरा दिन घिसकर

रत्ती भर मिलता दाम भी मुझको 


ऐ दुनिया! इतना दर्द दिया है, 

कभी तो अपना मान तू मुझको 

ज्यादा कुछ ना सही 

बस समझ ले अपने जैसा इन्सान तू मुझको.

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