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हर रात के बाद सवेरा है

Prince TulsianPrince Tulsian October 12, 2022
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बस निशा रात सो जाने को 
हर रात के बाद सवेरा है ।

चेहरे रंगो से लीपें पूते 
हर रंग बड़ा सुनहरा है ।
धूल जाएगा यह रंग छण भर का 
जो तन पर छट कर फैला है ।
रंग दे हर तन हर मन को 
जैसे इंद्रधनुष का घेरा है ।
छूप नहीं सकता अंधेरे में
सूरज को साँझ ने घेरा है ।
बस निशा रात सो जाने को 
हर रात के बाद सवेरा है ।

क्यू ओढ़ के चादर चेहरे पर 
निकले हो जैसे पहरा है ।
मुस्कान जो फैलीं होंठों पर 
तो मन क्यूँ इतना कैसैला है ।
जीवन रूपी इस कर्म रथ पर 
बढ़ जाओ पथ सुनहरा है ।
खिलते रंगो को देख लो थोड़ा 
रंगरेज़ ने रंग जो बिखेरा है ।

बस निशा रात सो जाने को 
हर रात के बाद सवेरा है 
हर रात के बाद सवेरा है ।।

प्रिन्स तुलसीयन

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