शुक्राना's image
Poetry1 min read

शुक्राना

PreetiPreeti March 6, 2022
Share0 Bookmarks 61 Reads1 Likes

हम हिसाब रखते हैं वक्त का,

हम हिसाब रखते हैं पैसों का,

हम हिसाब रखते हैं सामानों का,

पर

हम हिसाब रखना भूल जाते हैं

मोहब्बतों का

और भूल जातें हैं

शुक्राना अता करना ख़ुदा का,

ख़ुदा के बंदों का.........।।

Preeति





No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts