आओ एक बार फिर से तुम्हें देख लू,  क्या पता ये सावन फिर कब मिले ।'s image
Love PoetryPoetry1 min read

आओ एक बार फिर से तुम्हें देख लू, क्या पता ये सावन फिर कब मिले ।

प्रवीण मुन्तजिरप्रवीण मुन्तजिर August 29, 2021
Share0 Bookmarks 94 Reads1 Likes

आओ एक बार फिर से तुम्हें देख लू,

क्या पता ये सावन फिर कब मिले ।


अपने तन की खुशबू को दे दो जरा,

क्या पता ये मधुवन फिर कब मिले ।


तेरी आंखो का काजल बन के रहू,

तेरे नैनों की अठखेलिया देखता रहूं।


आओ एक आखरी चुंबन दे दो जरा,

क्या पता ये बहार फिर कब मिले।

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts