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दिल -ऐ- नादान मान

Praveen DhakarPraveen Dhakar May 28, 2022
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दिल -ऐ- नादान,
        मान बैठा है जिसे सबकुछ , मैं उसका कुछ हो भी नहीं सकता 
       बोझ जिम्मेदारियों का जो है कंधों पर , मैं तो कहीं खो भी नहीं सकता.....,.

–Praveen Dhakar ❣️

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