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बंसीधर की बंसी

Pratima PandeyPratima Pandey August 30, 2021
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यूं तो जब जब बजाते थे बंसीधर अपनी बंसी , 

राधा संग सारी गोपियां थीं सुध-बुध खो देतीं । 

मगर कृष्णा के प्रेम में हो गईं थीं राधा इतनी दीवानी ,

 कि मोहन की मुरलिया उन्हें अब तनिक नहीं थी भाती ।

अपने कन्हैया के अधरों पर बंसी को देखकर ,

राधा रानी के तन मन में थी आग लग जाती ।

प्रेम के संग-संग लिया करती है ईर्ष्या भी जन्म,

फिर भला कैसे बच पातीं इस से वृषभान दुलारी ।

- प्रतिमा पांडेय

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