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हृदय की ज्योति

Prakriti AgrawalPrakriti Agrawal March 25, 2022
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आंखों को ना पढ़िए, यह भावुक हैं, भावना में बह जाएंगी,

चेहरे से हाल-ए-दिल पूछिए, इसे दर्द में मुस्कुराना आता है।

आंखें है निश्छल, ह्रदय का दर्पण,

ह्रदय का हर भाव कर देतीं है प्रतिबिंबित, चेहरा एक कुशल राजनीतिज्ञ ,

परिस्थितिनुसार भावना करता है दर्शित।

नाता आंख और ह्रदय का जैसे दीया और बाती ,

हृदय अपने अंतस से उन्हें सींचे, वह फैलातीं उसकी ज्योति।

चेहरा जब ह्रदय की वाणी ना समझता,

तब आंखों को ही निहारता ,

इस कशमकश में कई बार आंखों के रंग में रंग जाता।

ह्रदय निरंतर एक लय में धड़कता ,

फिर भी आंखें उसकी मनोदशा को समझतीं

आंखें जैसे उसकी जीवनसंगिनी, हृदय की भावनायुक्त अभिव्यक्ति।

चेहरा जो हर किसी की पहचान ,

छुपा लेता है दिल का मर्म, बिखेर के एक मुस्कान।

आंखों और हृदय का संबंध जीवन पर्यंत,

मूंद जाती हैं आंखें जब खोता हृदय स्पंदन।

चेहरा जिसका जीवन इनके प्रेम रस से था जीवन्त,

रह जाता है किंकर्तव्यविमूढ़, नीरस, ठगा सा बेरंग।

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