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ह्रदय की ज्योति

Prakriti AgrawalPrakriti Agrawal March 24, 2022
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आंखों को न पढ़िए, यह भावुक हैं,भावना में बह जाएंगी ,

चेहरे से हाल-ए-दिल पूछिए ,इसे दर्द में भी मुस्कुराना आता है।

आंखें हैं निश्छल , ह्रदय का दर्पण ,

ह्रदय के हर भाव को करती प्रतिबिंबित।

चेहरा एक कुशल राजनीतिज्ञ,

परिस्थितिनुसार भावना करता दर्शित।

नाता ह्रदय और आंखों का, जैसे दीया और बाती,

हृदय अपने अंतस से उन्हें सींचे, वह फैलातीं उसकी ज्योति।

चेहरा जब हृदय की धड़कन को ना समझ पाता ,

तब आंखों को ही निहारता ,

इस कश्मकश में कई बार ,आंखों के ही रंग में रंग जाता।

ह्रदय तो निरंतर एक लय में ही धड़कता,

फिर भी आंखें उसकी मनोदशा को समझतीं।

आंखें उसकी जीवनसंगिनी, ह्रदय की भावनात्मक अभिव्यक्ति।

चेहरा कभी तो हृदय का देता साथ, कभी करे उलट प्रहास।

आंखों और हृदय का संबंध जीवन पर्यंत,

मूंद जाती हैं आंखें, जब खोता ह्रदय स्पंदन।

चेहरा जिसका जीवन इस प्रेमरस से था जीवन्त,

रह जाए किंकर्त्यविमूढ , नीरस, ठगा सा बेरंग।

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