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प्रलय ज्वाला

PragyaPragya August 19, 2022
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प्रलय ज्वाला


हो प्रचंड अग्नि ऐसी, कि अंबर भी ढक जाए धूम से।

बजे रणभेरी ऐसी, कि प्रश्न करें सभी महाकाल से।।

निकाल लो तलवार, नष्ट कर दो निस्सार जगत को शान से ।

धधका दो प्रलय ज्वाला ऐसी, कि कठोर बन जाएँ सभी सुमन से।।

करके एक करारा वार, हो अनुरंजित तुम विप्लव से।

निकालो ध्वनि ऐसी, कि आ जाए उद्वेलन मुरज से।।

प्रलय की इस महाविभिषिका में, हर बंधन टूट जाए जीवन से।

हर ओर निराशा, भय, क्रंदन और चित्कार श्रव्य हो भूमंडल से।।

मूर्त हुई इच्छा अब सृष्टि की, काल चक्र के इस महाविनाश से।

जमने लगे शोणित, उगने लगे जीव, निर्मल हुआ ब्रह्मांड, जीवन चिन्ह के इस आभास से।।


----- प्रज्ञा-----


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