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सफ़र और मंज़िल

Pragya ShuklaPragya Shukla November 16, 2021
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सफ़र की मुश्किलों को सोच कर मंज़िल न बदलो तुम! 

अभी तबियत से दो भी कदम कहाँ चला तुमने? 



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