फागुन's image
Share0 Bookmarks 14 Reads1 Likes

फागुन में सब घर है आये

साजन! तुम फिर नहीं आये

सखी सहेली मुझे चिढ़ाये

तुम्हारे साजन फिर नहीं आये।


सब सखी करें हँसी ठिठोली

निज साजन संग खेले होली

सासू ननद भी ताना मारे

बहू तुम्हीं हो नखरीली।


उनको कैसे मैं समझाऊं

बदमाशी तुम्हारी क्या बतलाऊं

चलते हो तुम सब चालाकी

नखरीली बस मैं कहलाऊं।


अब ना सुनूंगी कोई बहाना

मैं भी चली बाबुल के घराना

सोच लो साजन! सारी बातें

पड़ जाये ना तुमको पछताना।



No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts