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इन निगाहों से

Pragya ShuklaPragya Shukla August 29, 2021
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कातिलाना इन निगाहों से यूँ ना छेड़ा कीजिए। 

सीधा सा है दिल मेरा चंचल ना इसको कीजिए।।


ग़र मैं कुछ कह गया गुस्ताख़ दिल कह लाऊँगा। 

आपकी इन गुस्ताखियों को भी नवाज़ा जायेगा।।



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