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"क्षण क्षण मैं दर्पण बन जाती क्षण क्षण वो दर्पण में होता....."

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल March 25, 2022
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'क्षण क्षण मैं दर्पण बन जाती

क्षण क्षण वो दर्पण में होता'



एक भंवर अन्तस में होता

जब प्रियतम स्वप्नों में होता,


भावों में लहरें उठ जातीं

जब वह मीत नयन में होता,


छाया की भाषा का चित्रण

गीत ग़जल कविता में होता,


क्षण क्षण मैं दर्पण बन जाती

क्षण क्षण वो दर्पण में होता।


---प्रदीप सेठ सलिल


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