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'चटक चटक कर मेहनत पिघली....'

Pradeep Seth सलिलPradeep Seth सलिल February 21, 2022
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"घर पर दुख की चढ़ी लताएँ"



दरिया में देखी परछाईं

लहरें पीर बनी घर आयीं,


घर पर दुख की चढ़ी लताएँ

इकलौते कमरे में आयीं,


चुन्नू का बस्ता है खाली

अभी किताबें घर न आयीं,


न लाई मैया कुछ रोकड़

मांगें लेनदार से आयीं,


छोड़ पढ़ाई दोनों बहने

काम लगा घर वापस आयीं,


चटक-चटक कर मेहनत पिघली

जब तकलीफ़े घर पर आयीं।


--प्रदीप सेठ सलिल


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