*कृष्णमय*'s image
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कृष्णमय हो रहा है आज ये जहाँ सारा ।
बह रही है दिलों में प्रेम की  अमृतधारा ।
काश ! ये धारा बहती रहे ऐसे ही हरदम,
होगा नही फिर कभी जीवन में ऐसा अंधियारा ।।
वक्त है प्रबल ये संसार ही नश्वर है - -
मिथ्या है सभी कुछ सत्य केवल ईश्वर है - -
'गीता' को समझ लें उद्धार होगा तब हमारा ।
होगा नही फिर कभी जीवन में ऐसा अंधियारा ।।
जरूरतें कम हैं किन्तु फिर भी बढ़ा रहे हैं हम - -
खुद ही इस चमन को कबसे मिटा रहे हैं हम - - 
साथ अपने दूसरों को भी लगाओ उस किनारा ।
होगा नही फिर कभी जीवन में ऐसा अंधियारा ।।
कृष्णमय ये तपोभूमि कृष्णमय है ये हवाएँ - -
कृष्णमय सारी धरित्री कृष्णमय सारी दिशाएँ - -
कृष्णमय जो रम गया हो उसने ये जीवन सुधारा ।
होगा नही फिर कभी जीवन में ऐसाअंधियारा ।।

स्वरचित
प्रभु


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