ग़ज़ल's image
Share0 Bookmarks 121 Reads0 Likes
क्यों करूँ मैं इश्क़ तू समझा मुझे
इश्क़ से आख़िर मिला है क्या मुझे

जब सदा कोई नहीं सुनता मिरी
चीखकर भी शोर क्या करना मुझे

गाँव से मैं आ गया तेरे नगर
तू मगर मिलने नहीं आया मुझे

दर्द चेहरे पे लबों पे ख़ामुशी
उसकी आँखों में दिखा दरिया मुझे

ज़ख्म देखो देखकर फिर जाओ तुम
ये न पूछो दर्द है कितना मुझे

शक़्ल सूरत तो तिरे जैसी नहीं
पर मिरा चहरा लगा अच्छा मुझे

©प्रभाकर "प्रभू"

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts