जज्बा's image
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दर्द की आहें सिमट क्यूं नहीं जाती,

तेरी हर तकलीफ मिट क्यूं नहीं जाती,

ये माना बहना है दरिया का मक़सद,

कुछ बूंदे सिपियों में ठहर क्यूं नहीं जाती


कितना अफसोस करें अपने किए का,

घाव की दिवारे भर क्यूं नहीं जाती,

ये माना पतंगे को जलना है लौ में,

वो नन्ही सी जान घर क्यूं नहीं जाती


महोबबत में खुद को मिटाया हैं हमने,

खोयी हूं खुद से मिल क्यूं नहीं जाती,

तूझे पाने का जज्बा क्यूं अब तक है जिंदा,

उम्र कटती है, तमन्ना मुकुर क्यूं नहीं जाती..

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