अक्स's image
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सुलगते नैनों की मशाल छोड़,
अंधेरे में भला क्या पाएगा,
ज्यों ही रोशन करेगा तू दियों से आशियां अपना,
हर शक्श में मेरा अक्स उभर आएगा..

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