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वो दिन भी क्या गज़ब थे

Pooja MishraPooja Mishra December 7, 2021
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वो बचपन की यादें, वो गांव की बातें

वो दादी के किस्से, वो परियों सी रातें

वो बागों में जाना, पके आम खाना

वो पेड़ों की टहनी, का झुक जाना

बच्चों का उसका, झूला बनाना

वो खेतों की माटी, कपड़ों में लगाना

वो कीचड़ की मस्ती, में घर भूल जाना

वो कंचों का खेल, गयिया को चराना

पेड़ों की छाॅंव में, जा के सो जाना

दूसरों के खेतों, से गन्ने चुराना

यारों को देना, और हॅंस के बताना

वो पापा के साइकिल, पर कैंची चलाना

वो गिरना, वो उठना और सीख जाना

वो बाबा का ऊंगली, पकड़ के चलाना

वो छत पर जाना, और तारे गिनाना

वो खुले आसमा में सपने सजाना

वो चिड़ियों से उड़ने, का ख़्वाब आना

वो भूसों की ढेरी में छुप जाना

वो बचपन की बातों का याद आना

वो होठों पे मुस्कान और आँखें भर जाना

वो बचपन की यादें, वो गांव की बातें

वो दादी के किस्से, वो परियों सी रातें

-© पूजा मिश्रा

स्वरचित



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