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इश्क़ करके हारे (गजल)

PRAVEEN KUMAR VERMAPRAVEEN KUMAR VERMA December 8, 2021
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इश्क़ करके हारे


चली जो हवा हम भी तुझमें बहने लगे 

इश्क़ करके हारे खुद में सिमट कर जीने लगे। 


इश्क़ की गली में हम जो आसानी से लुट गये 

बारिशों की तरह मेरे रातों में आँसू बह गये। 


कली जो खिली यारा खिल न पायी कभी 

साथ चलते चलते न जाने कब बिछड़ गये हमीं।


मोती की माला टूटी बिखरे है मोती सारे 

रिश्तों के बंधन टूटे हम इश्क़ करके हैं हारे। 


Praveen kumar Verma 

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