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गुरुओं को प्रणाम

pinki jhapinki jha September 6, 2021
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शिक्षकों का दिन है ,

उनकी है आज रात ,

होनी चाहिए बस उनकी बात ,

मौका है और दस्तूर भी ,

तो करलेते है उनको प्रणाम ,

जिनके भूल नहीं सकते नाम ,

रोशन करना है जिनका नाम ,

करके कई अनगिनत काम |


माता जननी है और प्रथम गुरु ,

प्रथम दिन से सिखलाना करती है शुरू ,

हो दूध पीना या करना दुविधाओं का दमन ,

हर मोड़पर खड़ी तैयार थी लिए अपना दामन ,

रोये तो आँसू पोछकर हौसले देने तैयार रही ,

अंधेरो में मेरी हाथो का मशाल रही ,

जीती लड़ाईया उनकी सीख बनी ढाल रही ,

छुटपन-बढ़पन ही नहीं जिंदगी उनकी बदौलत कमाल रही |


द्वितीय का रहा है सदा से थोड़ा कम मोल, 

जानते है भले कहते न हो है वो कितने अनमोल ,

पिता रहे हमारी सबसे बड़ी पूंजी है ,

साथ वो है तभी तो ये आवाज़ गुंजी है ,

सख्त रहकर छुपाये कोमल ह्रदय ,

भूख और जरूरतों की आग से हमे बचाने ,

घर और प्रियजनों से न चाहकर भी दूर रहे ,

किसी किताब में लिखा नहीं जो सबक ,

नज़रो के सामने देखा है ,

पिता के जीवन से बहुत कुछ सीखा है |


ऐसा रहा न कोई विषय ,

जो पढ़ाये वो हम न सीखे ,

बार बार पूछकर समझनेवाले वो महान थे ,

नादानियों से भरे कभी बड़े कभी छोटे, 

जितने भी सवाल थे ,

अध्यापक-अध्यापिकाएँ जवाब लिए हमेशा तैयार थे , 

ज्ञान अंक का हो या अक्षर का ,

हो इतिहास ,भूगोल, विज्ञान या ज्यामिति,

या हो अर्थशास्त्र,लेखाकर्म या राजनीति,

अज्ञान अँधेरे या मिटाया लगाकर सही रणनीति,

अथक प्रयासो को उनके नमन ,

अडिग रहे सीखने को चाहे उनपर जो बीती |


चर्चा हो शिक्षकों की और नाम उनका न ले हो नहीं सकता ,

जीवन से बड़ा शिक्षक इस धरती पर कोई हो नहीं सकता ,

बिना कलम किताब के जीवन ने जो सीखा दिया, 

किसी के बस की नहीं ऐसे पाठ पढ़ा समझा गया ,

जो सीखता चला उसे सर्वोपरि बना दिया |


है सास्वत दंडवत प्रणाम सभी गुरुओं को ,

जाने अनजाने ज्ञान बाँटकर ,

उलझने सुलझाकर ,

पथ दिखाते रहे सुगम बनाते रहे जो जीवन को ,

जो कर गए हमारे लिए तूलना उसकी नहीं ,

बाँट पाए सीखा जो भी किसीको, 

गुरु दक्षिणा हमारी होगी उनको यही |


- पिंकी झा 



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