Pegasus प्रजातंत्र's image
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सूंघते रहने की कला बड़ी पुरानी है,

कोई इत्र सूंघता है तो कोई आब,

सरकारें पत्रकारों के whatsapp सूंघती है,

और नेता सूंघते हैं जन सैलाब।


जब कोई लोक प्रसिद्धि सूंघ रहा हो,

सच्चाई का बेवक्त निकल जाना भी हो जाता है खराब।

प्रजातंत्र में कुछ लोग सब कुछ बोल सकते हैं,

और बाकी आम जनता होती है जनाब।


जब प्रतिपक्ष में थे तो वो भी सूंघ रहे थे बढ़ती कीमतों को,

रोज मांगते थे सत्ता पक्ष से जवाब।

अब जो विराजमान हैं सिंहासन पे,

Pegasus पे बैठ के रोज उड़ते हैं बेहिसाब।


                       - (रोमिल) 

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