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ऑक्सीजन तो माया है,

दिखता नहीं है पर पूरे वातावरण में छाया है।

यूहीं लोग मरते हैं,

पतझड़ में तो अक्सर सूखे पत्ते झड़ते हैं।


फिर भी जो रह गई कमी,कुछ बाबा लोग भी आयेंगे।

काढ़े का भी ताना बाना है,अपना पूनावाला भी मेरा दीवाना है।

कुछ लोग तो परछाइयों से भी डरते हैं।

पतझड़ में तो अक्सर सूखे पत्ते झड़ते हैं।


सिलेंडर की तुम बात मत करना।

उज्ज्वला में दे दिया मैंने, देखो क्या उस से काम चलता है।

सांस तो आती जाती रहती है,पर तुम्हारा चूल्हा तो जलता है।

लकड़ियां नहीं मिली तो क्या, नदियों में ही बहते हैं।

पतझड़ में तो अक्सर सूखे पत्ते झड़ते हैं।


#OxygenShortage

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