हे राम !'s image
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हे राम ! पुनः आना होगा

धरती की पीर मिटाने को

तेरे समय एक रावण था

अब रावण की फौज खड़ी

सीताएँ अपमानित होतीं

सहती पीड़ा पड़ी पड़ी

हनुमान अब कोई नहीं, हाँ

मेघनाद हैं भरे पड़े

कोई लक्ष्मण जैसा भाई

कहाँ किसी के साथ खड़े ?

नहीं सखा सुग्रीव समान

ना ही अंगद जैसा वीर

खर दूषण त्रिसरा जैसे

कितने ही प्रकट हुए शरीर।

कहना ना माने बेटा बेटी

सभी हुए जाते अविवेकी

आज धर्म के नाम पर

लूट मची है पैसे की ।

अब भी ना आए ना तो

नहीं बचेगी यह धरती

देर करो मत आने में

कहता है कवि 'फरियादी'


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