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कारीगर ख़ुदा

Nivedan KumarNivedan Kumar April 30, 2022
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मिला न ख़ुद सा मोतबर कोई

न हम-नशीं न हम-नज़र कोई


ख़ुदा तुम सा न कारीगर कोई

बा-हुनर कोई बे-हुनर कोई


तमाम उम्र सफ़र में रहा लेकिन

न मंज़िल मिली न हमसफ़र कोई


मैं एक ऐसे शहर में रहता था

जहां गली थी ना रहगुज़र कोई


खुदा यह कैसी है तेरी दुनिया

चश्म-ए-तर कोई खुश-नज़र कोई


बीमारी हो जो लाइलाज तो फ़िर

क्या करेगा चारागर कोई

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