सजग होकर चलो's image
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ये समझना पड़ेगा...

गोल आकृतियों में कोने नहीं होते,

जहां आप रुक सको,

छुप सको,

ठहर सको,

वहां तो हो सकता है केवल सतत प्रवाह...

धरती, सूरज, चांद सभी तो गोल हैं,

उनकी परिक्रमाएं भी गोल हैं,

ये सब अनायास नहीं है,

ये यथार्थ है,

कि चलते रहने के अतिरिक्त अन्य कोई विकल्प नहीं।

तो चलो...

अनभिज्ञ नहीं, सजग होकर चलो,

और तब तक चलो,

जब तक आपके जन्म से उपजे हुए

शून्य के निर्वात को,

भर ना दे आपकी मृत्यु...


~ नितिन कुमार हरित

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