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अंजाना इश्क part-7

siya Raghuwanshisiya Raghuwanshi July 2, 2022
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सिया जैसे ही अंदर जाती है अभिषेक उसे डाट ने के पूरे मूड में रहता है और सिया के अंदर आते ही 

अभिषेक- आज तुम्हारे ऑफिस का दूसरा दिन है और तुम अभी से इतनी लेट आ रहीं हो तो पूरे महीने क्या करोगी हाँ 

सिया- o हेलो मैं इतनी लेट थी नहीं वो तो आप ने मुझे लेट कर दिया 

अभिषेक- what मैंने मैंने तुम्हें लेट किया  और क्या मैं ये जान सकता हूँ कि मैंने आप को लेट कैसे किया है 

सिया- ये जो बिना बजह आप ने मुझे ये कथा सुना दी ना इसे सुनते सुनते ही मैं लेट हो गई नहीं तो देखिये मेरी घड़ी में तो अभी 8 ही बजे है 

अभिषेक- अच्छा तो मैं तुम्हें बता दूँ कि तुम्हारी घड़ी गलत है बिल्कुल तुम्हारी ही तरह अब 8 नहीं 10 बज चुके हैं समझी तुम 

सिया- मैं कैसे मान लू मेरी घड़ी में तो अभी 8 ही बजे है 

अभिषेक- तो तुम अपनी घड़ी के हिसाब से ही चलोगी 

सिया- हाँ और कुछ, जाइए आप यहां से खुद को तो कोई काम है नहीं पर मुझे बहुत काम है अब आप जाओ यहां से और मुझे अपना काम करने दो 

इतना कह कर सिया वहां से चली जाती हैं अभिषेक उसके बारे मे सोचता रहता है ये लड़की आखिर खुद को समझती क्या है मेरे ऑफिस में आकर मुझ से ही बहस करती रहती हैं 

इधर जय अभिषेक से मिलने के लिए आता है 

जय- अभिषेक कहा है 

मेनेजर- माफ़ कीजिए वो तो अभी अभी निकल गए यहां से आप ने पहले क्यों नहीं कहा कि आप आ रहे हो मैं सर को रोक कर रखता 

जय- कोई बात नहीं मैं उसके घर चला जाऊंगा पर तुम यह बताओ की वो डायरी बाली लड़की मिली क्या उसे 

मेनेजर- सर वो पूरी कोशिश कर रहे हैं उसे ढूंढने की जैसे ही वो लड़की हमे मिलेगी हम आप को ख़बर कर देंगे 

जय- अच्छा ठीक है मैं चलता हूँ और कोशिश करना की वो लड़की मुझे जल्दी मिले 

" दोस्त कुछ ऐसे भी होते है जो अपने बन कर अपनों की ही पीठ में छुरा भोकते है कहने को तो जय और अभिषेक बहुत अच्छे दोस्त हैं लेकिन सच तो यह कुछ और ही है जो जय अपने दोस्त पर इतना भरोसा करता है वहीं दोस्त उस लड़की को जय से छिपा रहा हैं जिसकी उसे बहुत जरूरी है " 

सिया ऑफिस से घर आते time पूजा से मिलती है और वो दोनों मंदिर जाती है 

पूजा- क्या हुआ सिया अब तुझे अचानक मंदिर क्यों जाना है 

सिया- आज मेरा मन बहुत उदास है मंदिर चलते है ना वहा शांति मिलेगी हमे थोड़ा सा पुण्य भी हो जाएगा और साथ में महादेव के दर्शन भी हो जाएंगे 

पूजा- ठीक है चल 

दोनों पहले मंदिर जाती है फिर मंदिर से घर आती है 

इधर जय अभिषेक के घर पहुंच जाता है 

अभिषेक- अरे जय तू यहां कैसे 

जय- तुझे तो पता ही है ना कि मुझे उस लड़की की बहुत जरूरत है इसलिए में यहां तेरे पास आ गया इसमें मेरे तीन फायदे हैं पहला मुझे अपने ऑफिस जाने का मोका मिलेगा दूसरा तेरे साथ रहने का तीसरा हो सकता है कि मैं भी तेरी मदद कर सकू और वो लड़की हमे जल्दी ही मिल जाए 

अभिषेक- हाँ बात तो तेरी सारी सही है 

अगले दिन दोनों साथ मिल कर ऑफिस जाते हैं 

अभिषेक- अपने ऑफिस में जय को लेकर जाता है और सिया के आने से पहले ही वो उसे सब से मिला देता है और सिया के आते ही जैसे वो उसे छिपाने की कोशिश करता है लेकिन जय की नजर सिया पर पड़ती है 

जय- अरे ये कोन है इससे तो मैं मिला ही नहीं मुझे इससे भी मिलाओ 

अभिषेक- चल छोड़ ना तू गाड़ी में बैठ में कुछ पेपर लेकर आता हूँ जय गाड़ी में जाकर बैठ ता है तभी सिया 

सिया- कोन थे सर ये जिनसे आपने सभी को मिलवाया बस मुझे छोड़ कर मैंने आपका क्या बिगाडा है 

अभिषेक- वो एक नंबर का बदतमीज और घटिया आदमी है और मैं नहीं चाहता कि उसका साया भी तुम पर पड़े इसलिए तुम्हें उससे नहीं मिलवाया मैंने, इतना कह कर अभिषेक वहां से चला गया 

रात को पूजा सिया के घर आती है क्योंकि आज उसके घर पर कोई है नहीं तो आज वो सिया के साथ ही रहेगी 

पूजा- इतनी देर हो गई है मुझे यहां आये और में जब से आयी हूँ तब से देख रही हूँ कि तू मुस्करा रही है और कुछ सोच भी रहीं हैं बता ना क्या सोच रहीं हैं चल मेरी सुन ले तुझे पता है आज ऑफिस में पहली बार हमारा बॉस जय आया था वो भी तेरे बॉस अभिषेक के बारे में यार क्या लग रहे थे दोनों मेरी तो नजर ही नहीं हटी दोनों पर से  अब तू बता की क्या सोच रही है 

सिया ऑफिस की सारी बाते पूजा को बताती हैं 

पूजा- ओ हो क्या बात हैं कहीं उस अभिषेक को तुझसे प्यार व्यार तो नहीं हो गया 

सिया- ऐ चुप तू बोलने से पहले सोचती नहीं है बस कुछ भी बोलती है अब सो जा good night

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