तराज़ू's image
Share0 Bookmarks 90 Reads0 Likes
कभी बदतमीज़ी तो कभी बेबाकी से बोलते हो,
तुम सच बताओ,
तुम इश्क़ को किस तराज़ू पर तोलते हो!

मेरा कहना भी तुम्हें खल रहा है,
तो तुम अपना मुँह कैसे खोलते हो..

सुनो ज़रा धीरे से नाम लो मेरा
क्युकिं तुम जब भी बोलते, 
बुरा ही तो बोलते हो!

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts