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"परिवर्तन "

Neena SethiaNeena Sethia February 21, 2022
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                     ...........परिवर्तन........... 

सब कुछ गतिशील है जग में..
सब कुछ आना-जाना है..
"मूल-मंत्र " ये..जीवन का..
शाशवत ये..सत्य पुराना है ,
आधारशिला उम्मीदों की...
आशा का...सम्बल माना है ,
नव सीमाओं के अंतरगत.... परिचय फिर..वही पुराना  है. 

फिर से त्रस्त सभी दिखते हैं...
फिर मन में सबके है पीड़ा...
ह्रदय-विदारक  बातों ने फिर.... अंतरमन सब का चीरा...
सब भयभीत हुए बैठे हैं...
कब क्या..होगा जीवन में..?
पर आशा की एक किरण... विश्वास जगाती है मन में . 

लॉक डाउन तो सीमित है...
पर गलियारे सब सूने हैं...
तेज हवाओं के झोंके...
कानों में आ.. फिर गूँजे हैं..
सूखे पत्ते.. पेड़ों से गिर...
फिर से ..कोराहम करते हैं..
खामोश सदाओं से अपनी..
मन में सूनापन  भरते हैं . 

न बच्चों का कोलाहल...
न मित्रों की महफिल है...
न कोई उत्सव न विवाह...
न त्यौहारों की हलचल है,
न बाग़ों में चहल-पहल...
न खुशबू ,न कोई रंगत है...
कैसे ये दिन..जीवन के हैं ?
फिर उदास सब का मन है.



वक़्त न रुकता है रोके से...
न कोई उसको रोक सका...
जब जब जो होना निश्चित है...
क्या कोई टोके...टोक सका ?
जिसने जन्म लिया धरती पर...
वो निश्चय कर जायेगा..
न कोई विपदा.. न कोई व्याधि
कोई भी..रुक न पायेगा . 

इसी सत्य को थामें... अब
हम सब को आगे बढ़ना है...
डरना नहीं... हमें जीवन में..
हर संकट से लड़ना है ,
हम ज्ञानी.. हम अनुसन्धानी...
हम निज कर्मों के स्वामी हैं,
न-मुमकिन को.. मुमकिन कर दें
हम वो योद्धा अभिमानी हैं. 

बस... थोड़ा संयम.. थोड़ा अंकुश.. अपने जीवन में रखना है...
अपनी खींची "लक्ष्मण रेखा "पे.. खुद को अनुशाक्षित करना है,
मिल कर जब बांधेगे बंधन...
तब खुद को विजयी.. बनाएंगे..
सीमित रह कर मर्यादा में...
हर संकट से टकराएंगे .
असफल न होंगे अब प्रयास...व्याधि  को दूर...भगाएंगे.
असफल न होंगे अब प्रयास...व्याधि को दूर भगाएंगे.
                                                     नीना सेठिया

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