ज़िन्दगी's image
Share0 Bookmarks 233 Reads0 Likes

ज़िन्दगी.......



जिने के लिए करीब अपने बुलाती क्यों हैं ज़िन्दगी......

आ जाएं जो पास ज़रा सा, रुलाती क्यों हैं ज़िन्दगी......



मिल भी जाए अगर किसीको यहां ख़ुशी नसीब से......

चुपके-चुपके होंठों से हंसी, चुराती क्यों हैं ज़िन्दगी......



अमीर अरमानों पर बरसाती रहे दौलत की बारिश......

मुफ़लिस प्यासी मिट्टी को, भुलाती क्यों हैं ज़िन्दगी......



बेबस लबों से निकली पुकार तो कभी सुनती नहीं......

बेकदरों पर रहमत अपनी, लुटाती क्यों हैं ज़िन्दगी......



बेईमानों को छुपाए रखे हरदम बनावटी उसूलों से......

सिर्फ़ शरीफ़ों पे ही सवाल, उठाती क्यों हैं ज़िन्दगी......



- नरेश कुशवाहा

No posts

Comments

No posts

No posts

No posts

No posts