बहाना's image
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हमने हर बार माना है सच, उनके बहाने को

अब कौन सा आईना बचा है टूट जाने को


अंधेरों ने लील लिया पूरी तरह उजालों को

अब कोई दिया भी नहीं है मेरे पास में जलाने को


दिन गुज़रा किसी तरह, पर सांझ ढलते ही ,

फिर चली आएंगी उनकी यादें हमें सताने को


एक तरफा थीं वो राहें, यहां तक जिन से पहुंचे

कोई रास्ता न मिलेगा अब फिर से लौट जाने को

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